सिद्ध श्री खेमा बाबा की जीवनी | Jhalko Bikaner

 सिद्ध श्री खेमा बाबा की जीवनी | Jhalko Bikaner

सिद्ध श्री खेमा बाबा की जीवनी | Jhalko Bikaner


किसान नारोजी जाट जाखड़ राजस्थान के जोधपुर जिले में ओसियां के पास नेवरा गांव में रहते थे। विक्रम संवत 1882 में नारोजी ओसियां से अपने पुरे परिवार के साथ बाड़मेर जिले की बायतु तहसील में आ गए और यहां पर रहने लगे थे। विक्रम संवत 1892 को बायतु में नारोजी के घर देव उठनी एकादशी को पुत्र काना राम का जन्म हुआ था। कानाराम जी धर्म प्रेमी व्यक्ति थे जो हमेशा अपने इष्ट देव बिगाजी महाराज, गुसाई जी महाराज और पिथल भवानी का पुजा पाठ करते थे। कानाराम जी का विवाह बायतु चिमनजी निवासी फताराम जी गुजर की सुपुत्री रूपांदे के साथ विक्रम संवत 1913 की माह सुदी 5 को सम्पन्न हुआ। बायतु रेलवे स्टेशन से छः किलोमीटर दक्षिण दिशा में धारणा धोरा में काना राम के घर विक्रम संवत 1932 फाल्गुन वदी छठ सोमवार को देव रूपी बालक खेमा राम का जन्म हुआ। बचपन से ही खेमा राम की लग्न भक्ति भावना में थी। थोड़ा बड़ा होने पर खेमा राम को गायों चराणे का काम सौंप दिया था। भक्ती भावना को देखते हुए घरवालों ने जल्दी ही विक्रम संवत 1958 में आसोज सुदी आठम शुक्रवार को गांव नोसर निवासी पिथा राम जी माचरा की सुपुत्री वीरों देवी के साथ शादी करवा दी थी। धिरे धिरे समय बितता गया दिनों दिन खेमा राम भक्ती में लिन रहने लगे। एक दिन घर से निकल सिणधरी के पास गोहिणा भाखर पर जाकर भगवान शिव की कठिन तपस्या करने लग गए। खेमा राम की भक्ति से भोलेनाथ प्रसन्न हो गए और भोलेनाथ से अनेकों प्रकार की सिद्धियां दे दी। सिद्धीया प्राप्त कर खेमाराम वापस बायतु आकर अलग से कुटिया बनाकर अपने भक्ति में मगन रहने लगे। हमेशा हाथ में कुल्हाड़ी और लोवड़ी पास रखते थे। एक दिन कतरियासर की फेरी बायतु की तरफ आई हुई थी और रात में जागरण जसनाथ सिद्धा का शब्द गायन सुनकर खेमा बाबा भी वाह चलें गए। फेरी में परमहस मण्डली के साधु राम नाथ जी महाराज थे। राम नाथ जी महाराज ज्ञानी पुरुष थे जिसको बेदाग एवं पिंगल शास्त्र का ज्ञान था। संस्कृत में डिग्री प्राप्त की हुई थी। ऐसे महापुरुष से मिलकर खेमा राम खुश हो गए जागरण शुरू हुई, शब्द गायन हुआ। अग्नि नृत्य भी हुआ तब राम नाथ जी ने खेमा बाबा को कहा खेमाराम जी अब आप भी कुछ सिद्धियां दिखाओ! खेमा राम ने जसनाथी जागरण पुणे धुणे को अपनी लोवड़ी (ऊन की कम्बल) में पुरे धुणे को समेट लिया, तब राम नाथ जी ने कहा क्या खेमा सिद्ध हों गया, गुरुजी आप कहो तो सिद्ध ही हु, वाह खेमाराम आज के बाद तुम खेमाराम नहीं खेमसिद्ध के नाम से जाने जाओगे। फिर खेमा सिद्ध ने गुरु रामनाथ जी महाराज से गुरु मंत्र लेकर आशिर्वाद प्राप्त किया और उनेको अनेकों प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हुई। रामनाथ जी महाराज बाड़मेर जिले के छोटु गांव के हुड्डा जाट थे जिसका जन्म नरसिगाराम हुड्डा की जोड़ायत खेतुदेवी सारण की कोख से हुआ था। धिरे धिरे खेमा बाबा की प्रसिद्धि चारों ओर फैलने लगी और खेमा बाबा ने अनेक समत्कार सिद्धियां दिखानी शुरू कर दी। खेम सिद्ध ने लालाराम जी ज्याणी की मरी हुई टोगड़ी (गाय की बछड़ी) को जीवित किया, गिगाई से गोगाजी की मूर्ति लाकर बायतु में स्थापित की पीछे वार आ गई वार को अंधा कर दिया माफी मांगने पर ठीक कर दिया, अरणे  का ढाई पान खिलाकर विरधाराम जी का दमा रोग ठीक करना, कोसला रामजी को सर्प काटा उसका इलाज राबड़ी लगाकर किया, गंगा रबारी को वचन देकर गंग तालाब गांव सरणु में बनवाया, शंकर लाल बाबू को पुत्र की प्राप्ति का आशीर्वाद दिया, धर्म चंद ओसवाल को झूठे दावे पर सर्प का चमत्कार दिखा, गांव सिणधरी के चारण जाति के कोढी की कोढ झाड़ी, गांव भाड़खा में कोढी की कोढ झाड़ी, जाणी चुतरा राम जी अनुपोणी  को रात्रि में दर्शन देकर अनेकों प्रकार की सिद्धियां बताइ, बायतु भीमजी निवासी हेमाराम दर्जी को दर्शन दिया, सिणधरी के नदी किनारे सुखी खेजड़ी को हरा कर दिया, समाधि के तिन दिन बाद धोलीडाग मालवा के सेठ श्रीचंद के पुत्र को जिंदा किया, ठाकर चनणसिह को सर्प और बिच्छू का चमत्कार दिखाया आदि अनेक चमत्कार दिखाया था। भक्तों को सर्प नाग बिच्छू अनेक जहरिले जीवों को काटने पर जो भी खेमा बाबा के शरण में आया उनके तांती बांधी वो जरूर ठीक हुआ है। खेमा बाबा एक महान महापुरुष थे। लोग भगवान शिव भोलेनाथ के अवतार के रूप में पूजते है। सती विरो देवी का स्वर्गवास होने पर जसनाथी परम्परा को मानकर बायतु में समाधी दी गई। एक दिन गुरु गोरखनाथ नाथ जी एवं जसनाथ जी महाराज के दर्शन करने के लिए महेगाणी मुंडो की ढाणी आए। दर्शन कर खेजड़ी के निचे आराम किया मुढो के घरों से राबड़ी मंगाई राबड़ी पिकर कहा मैं संसार छोड़ रहा हु, मेरी समाधि गोगाजी  मंदिर के पास देना यह कहकर  हर-हर भोले ओम नमः शिवाय का जाप जपकर स्वर्ग वासी हो गए। विकम ‌सवत 1989 फाल्गुन सुदी 5 को समाधी दी गई। आज जगह जगह धाम बने हुए हैं, जन्म स्थान धारणा धोरा , समाधि धाम बायतु, अरणेशवर धाम, पालरिया धाम, गोयणेशवर धाम, रावतसर, पनावडा,  अकदड़ा, माधासर, चोहटन, भुका, छोटु, मानगढ़, चारलाई, धारासर,रतेऊ   समेत अनेकों जगह मंदिर बने हुए हैं। माह और भादवा सुदी आठम के शाम जा‌गरण नवमी के दिन में मेला भरता है। जो भी दिन दुखी शरण आता है बाबा उसकी मनोकामना पूरी करते हैं।

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